Electricity METER AND BILL ISSUE
21-Jul-2026 (In Consumer Court Law)
मीटर को विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से बार बार बिलिंग बदलने में प्रयोग किया जाता है। रीडिंग बढ़ायी जाती है और फिर शिकायत पर घट जाती है। 5 साल से यही फ्रॉड चल रहा है लिखित शिकायत के बाद भी कार्यवाही करने के स्थान पर फर्जी निस्तारण कर दिया जाता है।
बिजली बिल में धोखाधड़ी और फर्जी निस्तारण के खिलाफ उपभोक्ता अदालत (Consumer Court) जाने का कानूनी रास्ता निम्नलिखित है:
जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत: बिजली सेवा में कमी (Deficiency in Service) और अनुचित व्यापार प्रथा (Unfair Trade Practice) के तहत उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अंतर्गत जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में परिवाद (Complaint) दर्ज करें।
लिखित साक्ष्य और दस्तावेज: पिछले 5 वर्षों के बिल, मीटर रीडिंग की रसीदें, की गई लिखित शिकायतें, और विभाग द्वारा दिए गए फर्जी निस्तारण (Disposal) के कागजात संलग्न करें।
मुआवजे और कार्रवाई की मांग: बढ़े हुए बिल की वसूली रद्द करने, मानसिक उत्पीड़न के लिए मुआवजे तथा दोषी अधिकारियों/विभाग के खिलाफ जांच व जुर्माने की मांग करें।
यदि आपकी बात सही है कि बिजली मीटर की रीडिंग विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से बार-बार बढ़ाई जाती है, लिखित शिकायतों का फर्जी निस्तारण किया जाता है और शिकायत करने पर आपके खिलाफ FIR दर्ज करा दी जाती है, तो इसे व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना चाहिए।
आप निम्न कदम उठा सकते हैं:
1. सभी साक्ष्य एकत्र करें:
बिजली बिलों की प्रतियां (पुराने और नए)
मीटर की रीडिंग की दिनांक सहित फोटो/वीडियो
सभी शिकायतों की रसीद/डायरी नंबर
विभाग द्वारा दिए गए निस्तारण की प्रतियां
यदि संभव हो तो RTI से संबंधित रिकॉर्ड प्राप्त करें।
2. RTI के माध्यम से जानकारी मांगें, जैसे:
मीटर रीडिंग का रिकॉर्ड।
मीटर बदलने/जांच की रिपोर्ट।
आपकी शिकायतों पर हुई कार्रवाई की फाइल नोटिंग।
शिकायतों का निस्तारण किस अधिकारी ने और किस आधार पर किया।
3. उच्च अधिकारियों को शिकायत करें, जैसे मुख्य अभियंता, प्रबंध निदेशक, राज्य विद्युत नियामक आयोग या संबंधित बिजली उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच।
4. यदि FIR प्रतिशोध में दर्ज हुई है, तो उसके तथ्यों के आधार पर हाई कोर्ट में उचित कानूनी उपाय (जैसे FIR को चुनौती देना, यदि कानूनन आधार हो) पर विचार किया जा सकता है। इसके लिए केस के दस्तावेज़ किसी अनुभवी अधिवक्ता को दिखाएँ।
5. यदि आपके पास रिकॉर्ड से यह साबित होता है कि शिकायतों का जानबूझकर गलत निस्तारण हुआ है, तो आप उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर कर स्वतंत्र जांच, सही बिलिंग और शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर सकते हैं।
ऐसे मामलों में केवल मौखिक शिकायतों पर निर्भर न रहें। हर शिकायत लिखित रूप में करें, उसकी प्राप्ति सुरक्षित रखें और सभी दस्तावेज़ों का क्रमवार रिकॉर्ड बनाकर रखें।
यदि आप बताएँ:
यह किस राज्य का मामला है?
FIR में कौन-कौन सी धाराएँ लगाई गई हैं?
बिजली वितरण कंपनी का नाम क्या है?
तो मैं उस आधार पर अधिक विशिष्ट कानूनी विकल्प बता सकता हूँ।
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