मेरे पति मुझे मानसिक रूप से torture करते हैं और कहते हैं कि वे नौकरी छोड़ देंगे ताकि मुझे भरण-पोषण (maintenance) न देना पड़े।
क्या भारतीय कानून में मानसिक यातना को भी घरेलू हिंसा माना जाता है?
अगर वह जानबूझकर नौकरी छोड़ देता है तो क्या कोर्ट फिर भी उसे maintenance देने का आदेश दे सकती है?
मुझे Domestic Violence Act और Maintenance के तहत क्या कानूनी कदम उठाने चाहिए?
नमस्कार,
आपकी परेशानी को मैं भली-भांति समझ सकती हूँ। आप चिंता न करें, कानून पूरी तरह आपके साथ है।
1. मानसिक यातना भी घरेलू हिंसा है: जी हाँ, भारतीय कानून के अनुसार मानसिक रूप से प्रताड़ित करना भी घरेलू हिंसा माना गया है। घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005 की धारा 3 के तहत 'भावनात्मक और मौखिक दुर्व्यवहार' को स्पष्ट रूप से हिंसा की परिभाषा में रखा गया है।
2. नौकरी छोड़ने से गुजारा-भत्ता खत्म नहीं होता: पति का जानबूझकर नौकरी छोड़ देना उन्हें गुजारा-भत्ता देने की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करता। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कई निर्णयों में कहा है कि न्यायालय पति की 'कमाने की क्षमता' देखेगा, न कि उसकी वर्तमान आय। यदि वे शारीरिक रूप से काम करने में सक्षम हैं, तो कोर्ट उन्हें आपको भरण-पोषण देने का आदेश दे सकती है।
आप तुरंत ये कानूनी कदम उठा सकती हैं:
1. डीवी एक्ट में केस: अपने नजदीकी मजिस्ट्रेट कोर्ट में घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज करें। इसमें आप सुरक्षा, निवास का अधिकार और मासिक गुजारा-भत्ता मांग सकती हैं।
2. सीआरपीसी 125: दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के अंतर्गत भरण-पोषण के लिए अलग से याचिका दायर कर सकती हैं।
अपने सभी सबूत जैसे मैसेज, कॉल रिकॉर्डिंग, गवाह या मेडिकल रिपोर्ट तैयार रखें। सही कानूनी मार्गदर्शन के लिए दस्तावेजों के साथ किसी अनुभवी अधिवक्ता से परामर्श करना उचित रहेगा।
मानसिक उत्पीड़न (Mental Cruelty) को भारतीय कानून में घरेलू हिंसा (Domestic Violence) माना जाता है। यदि पति लगातार अपमानित करता है, धमकी देता है, मानसिक तनाव देता है या जानबूझकर आपको आर्थिक रूप से असुरक्षित करने का प्रयास करता है, तो यह Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 के अंतर्गत कार्रवाई योग्य है।
भारतीय कानून में केवल शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक प्रताड़ना (Mental Cruelty) को भी घरेलू हिंसा माना जाता है। यदि पति लगातार धमकी देता है, अपमानित करता है या जानबूझकर नौकरी छोड़कर भरण-पोषण (Maintenance) से बचने की कोशिश करता है, तो यह न्यायालय के समक्ष एक महत्वपूर्ण तथ्य हो सकता है।
केवल नौकरी छोड़ देने से पति की कानूनी जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती। यदि न्यायालय को यह प्रतीत होता है कि पति ने जानबूझकर आय छिपाई है या maintenance देने से बचने के उद्देश्य से रोजगार छोड़ा है, तो न्यायालय उसकी शैक्षिक योग्यता, पूर्व आय, कार्य अनुभव तथा कमाने की क्षमता (Earning Capacity) के आधार पर भी भरण-पोषण निर्धारित कर सकती है। यहाँ तक कि यदि वास्तविक आय का स्पष्ट प्रमाण उपलब्ध न हो, तो न्यायालय स्थानीय क्षेत्र में प्रचलित न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wages) या दैनिक मजदूरी (Daily Wages) को आधार मानकर भी उसकी संभावित आय का आकलन कर सकती है, क्योंकि एक स्वस्थ एवं सक्षम व्यक्ति अपनी पत्नी और बच्चों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से बचने के लिए जानबूझकर बेरोजगार नहीं रह सकता।
आप Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 के अंतर्गत मानसिक उत्पीड़न, आर्थिक हिंसा एवं संरक्षण आदेश हेतु आवेदन कर सकती हैं। साथ ही CrPC की धारा 125 अथवा अन्य लागू प्रावधानों के तहत अपने एवं बच्चे के भरण-पोषण की मांग भी कर सकती हैं। सभी संदेश, ऑडियो, चैट, गवाह या अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखें, क्योंकि वे आपके मामले को मजबूत बनाने में सहायक होंगे।
aapke pati agar nokri chod dete h tb bhi unko maintainance dena hoga aapko kyuki maintainance patni ka adhikaar h na ki bheekh mansik yatna bhi domestic violence k antargat aati h aap dv act or 144 bnss kisi main bhi apne or bacho k loye maintainance le sakti h
हाँ, भारतीय कानून में मानसिक क्रूरता (Mental Cruelty) को भी घरेलू हिंसा (Domestic Violence) का एक रूप माना जाता है। यदि पति लगातार अपमानित करता है, धमकी देता है, मानसिक दबाव बनाता है, आर्थिक रूप से असुरक्षित करने की कोशिश करता है या यह कहता है कि वह केवल भरण-पोषण से बचने के लिए नौकरी छोड़ देगा, तो ऐसी परिस्थितियाँ Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 के अंतर्गत मानसिक एवं आर्थिक हिंसा (Emotional and Economic Abuse) की श्रेणी में आ सकती हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न निर्णयों में माना है कि मानसिक उत्पीड़न भी शारीरिक हिंसा जितना ही गंभीर हो सकता है और इससे पीड़ित महिला को विधिक संरक्षण प्राप्त है।
जहाँ तक भरण-पोषण (Maintenance) का प्रश्न है, केवल नौकरी छोड़ देने से पति अपनी कानूनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो जाता। न्यायालय पति की वास्तविक आय, शैक्षणिक योग्यता, कार्य-अनुभव, संपत्ति, जीवन-स्तर तथा आय अर्जित करने की क्षमता को भी ध्यान में रखता है। यदि यह सिद्ध हो जाए कि पति ने जानबूझकर या दुर्भावनापूर्वक नौकरी छोड़ी है ताकि पत्नी को भरण-पोषण न देना पड़े, तो न्यायालय उसकी earning capacity के आधार पर भी भरण-पोषण निर्धारित कर सकता है। अनेक मामलों में न्यायालयों ने कहा है कि एक सक्षम एवं स्वस्थ व्यक्ति अपनी वैधानिक जिम्मेदारी से बचने के लिए जानबूझकर बेरोजगार नहीं रह सकता।
ऐसी स्थिति में आप Domestic Violence Act, 2005 के अंतर्गत मजिस्ट्रेट न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर सकती हैं और संरक्षण आदेश (Protection Order), निवास आदेश (Residence Order), अंतरिम एवं अंतिम आर्थिक राहत (Monetary Relief), क्षतिपूर्ति (Compensation) तथा अन्य आवश्यक राहतों की मांग कर सकती हैं। साथ ही, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 144 के अंतर्गत भरण-पोषण का दावा भी किया जा सकता है। यदि विवाह हिंदू विधि के अधीन है और कोई वैवाहिक वाद लंबित है, तो हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 24 एवं 25 के अंतर्गत भी अंतरिम तथा स्थायी भरण-पोषण की मांग की जा सकती है। मानसिक उत्पीड़न से संबंधित संदेश, ऑडियो रिकॉर्डिंग, ई-मेल, व्हाट्सऐप चैट, गवाहों के बयान तथा अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखना आपके दावे को मजबूत बनाने में सहायक होगा।
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