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chargesheet and entire criminal proceeding had been quashed


10-Jun-2026 (In Criminal Law)
गलत जमीन का बैनामा करके धोखाधड़ी की क्रेता ने एफ आई आर दर्ज कराई धोखाधड़ी कर्ता एफ आई आर क्वाशिंग में गए मिडिएशन के नाम स्टे मिला, मिडिएशन फेल हो गया उच्च न्यायालय की डबल बेंच द्वारा धोखाधड़ी कर्ताओं की याचिका खारिज कर दी गई और पुलिस को अतिशीघ्र विवेचना के लिए आदेशित किया गया पुलिस ऑफिसर ने चार्जशीट न्यायालय में दाखिल किया और न्यायालय ने संज्ञान ले न्यायिक प्रक्रिया शुरु किया धोखाधड़ीकर्ता ने न्यायालय को गुमराह किया। हाई कोर्ट सिंगल बेंच ने चार्ज शीट और प्रक्रिया दोनों कोखारिज कर दिया आगे क्या
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Answer #1
639 votes
आपके द्वारा बताए गए तथ्यों के अनुसार मामला केवल FIR तक सीमित नहीं रहा था, बल्कि: • FIR दर्ज हुई • आरोपियों की क्वैशिंग याचिका दायर हुई • मध्यस्थता (Mediation) असफल रही • हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने याचिका खारिज कर विवेचना शीघ्र पूरी करने का निर्देश दिया • पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की • मजिस्ट्रेट ने संज्ञान लेकर कार्यवाही प्रारम्भ कर दी • बाद में आरोपियों ने पुनः हाईकोर्ट से चार्जशीट एवं समन/कार्यवाही को निरस्त करा लिया यदि वास्तव में सिंगल बेंच के समक्ष डिवीजन बेंच का पूर्व आदेश, मध्यस्थता की विफलता, या अन्य महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए गए थे, तो यह एक गंभीर कानूनी प्रश्न बनता है। अब सामान्यतः निम्नलिखित विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं: 1. रिकॉल / रीकॉल एप्लीकेशन यदि आदेश तथ्य छिपाकर (suppression of material facts) प्राप्त किया गया है, तो उसी पीठ/न्यायालय के समक्ष रिकॉल की मांग की जा सकती है। 2. स्पेशल अपील (यदि विधि अनुसार ग्राह्य हो) सिंगल बेंच के आदेश के विरुद्ध विशेष अपील की ग्राह्यता आदेश की प्रकृति पर निर्भर करेगी। 3. सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती यदि आदेश गंभीर कानूनी त्रुटि या रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों की अनदेखी पर आधारित है, तो Supreme Court of India में विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर विचार किया जा सकता है। 4. आदेश का गहन परीक्षण सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल यह मान लेना पर्याप्त नहीं होगा कि न्यायालय को गुमराह किया गया। यह देखना होगा: • सिंगल बेंच ने आदेश किस आधार पर पारित किया? • क्या डिवीजन बेंच का आदेश रिकॉर्ड पर था? • क्या चार्जशीट मेरिट पर रद्द हुई या तकनीकी आधार पर? • क्या राज्य सरकार ने आदेश को चुनौती दी है? महत्वपूर्ण इस प्रकार के मामलों में अक्सर लोग केवल FIR, चार्जशीट और पुराने आदेश देखकर निष्कर्ष निकाल लेते हैं, जबकि अंतिम आदेश की reasoning ही आगे की रणनीति तय करती है। यदि वास्तव में चार्जशीट और संज्ञान आदेश को तथ्यों के दमन (suppression) के आधार पर या रिकॉर्ड छिपाकर निरस्त कराया गया है, तो उसके विरुद्ध प्रभावी कानूनी उपाय उपलब्ध हो सकते हैं, लेकिन सही उपाय आदेश की प्रति पढ़े बिना तय नहीं किया जा सकता। Sangam & Sagar Law Office LLP में हम ऐसे मामलों में FIR से लेकर High Court और Supreme Court तक की रणनीति तैयार करते हैं। कई बार एक गलत चुनौती वर्षों का नुकसान करा देती है, जबकि सही मंच और सही उपाय मामले को पुनर्जीवित कर सकता है। यदि आपके पास: • FIR, • डिवीजन बेंच का आदेश, • चार्जशीट, तथा • सिंगल बेंच का क्वैशिंग आदेश उपलब्ध हैं, तो उनका परीक्षण करके ही आगे की सबसे प्रभावी कार्यवाही निर्धारित की जानी चाहिए। Adv. Vaibhav Sangam Mishra Advocate, High Court, Uttar Pradesh Sangam & Sagar Law Office LLP Criminal Litigation | Property Fraud | High Court & Supreme Court Matters
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Answer #2
956 votes
माननीय उच्च न्यायालय की सिंगल बैंच के आदेश के विरुद्ध डबल बैंच में फिर से जाइए,धोखाधड़ीकर्ता ने न्यायालय को गुमराह किया इससे संबंधित सभी दस्तावेज और साक्ष्य माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करते हुए अपना पक्ष रखिए।
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Answer #3
670 votes
नमस्ते, आपके मामले में कानूनी स्थिति अब काफी महत्वपूर्ण मोड़ पर है। चूंकि हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने चार्जशीट और निचली अदालत की संज्ञान (Cognizance) प्रक्रिया दोनों को खारिज (Quash) कर दिया है, इसलिए पीड़ित पक्ष (क्रेता/Buyer) के पास आगे निम्नलिखित कानूनी विकल्प मौजूद हैं: ​डिवीजन बेंच में अपील (Intra-Court Appeal): आप सिंगल बेंच के इस फैसले के खिलाफ उसी हाई कोर्ट की 1- डिवीजन बेंच (Double Bench) के समक्ष विशेष अपील दायर कर सकते हैं। चूंकि पहले डिवीजन बेंच ने ही त्वरित जांच का आदेश दिया था और आरोपियों पर अदालत को गुमराह करने का आरोप है, इसलिए यह एक मजबूत आधार बन सकता है। 2- ​सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी (SLP): यदि हाई कोर्ट के नियमों के तहत वहां अपील का विकल्प नहीं है, तो पीड़ित पक्ष इस आदेश को चुनौती देने के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) में विशेष अनुमति याचिका (Special Leave Petition - SLP) दायर कर सकता है। 3- ​रिकॉल एप्लीकेशन (Recall Application): यदि आरोपियों ने तथ्यों को छुपाकर या अदालत को गुमराह (Mislead) करके यह आदेश हासिल किया है, तो उसी सिंगल बेंच के सामने एक 'Recall Application' दायर की जा सकती है, जिसमें कोर्ट को यह बताया जाए कि आदेश गलत जानकारी के आधार पर लिया गया है। ​आपको तुरंत अपने केस के सभी दस्तावेजों और हाई कोर्ट के ताजा आदेश की प्रमाणित प्रति (Certified Copy) के साथ एक सीनियर एडवोकेट से परामर्श करना चाहिए ताकि बिना समय गंवाए अगली कानूनी कार्रवाई शुरू की जा सके।
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Answer #4
792 votes
1. you can appeal the quashing order. 2. you can file a complaint afresh with observation of the HC. 3. you can file special leave petition. 4. you can pursue civil proceedings. get in touch with an advocate of proper standing and have a detailed consultation.
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Answer #5
878 votes
आपके द्वारा बताए गए तथ्यों के अनुसार यदि हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने चार्जशीट एवं उसके आधार पर चल रही आपराधिक कार्यवाही को निरस्त (quash) कर दिया है, तो फिलहाल उस कार्यवाही का प्रभाव समाप्त माना जाएगा। हालांकि यह जानना आवश्यक है कि आदेश किन आधारों पर पारित हुआ है। यदि न्यायालय को गुमराह करके आदेश प्राप्त किया गया है या महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए गए हैं, तो पीड़ित पक्ष आदेश की समीक्षा/रिकॉल अथवा उपयुक्त कानूनी उपाय, जैसे विशेष अपील (जहां विधि में प्रावधान हो) या उच्चतर न्यायालय में चुनौती देने पर विचार कर सकता है। प्रत्येक मामले के तथ्य एवं न्यायालय के आदेश की भाषा अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। आदेश एवं संबंधित दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद ही आगे की कानूनी रणनीति पर सही सलाह दी जा सकती है।
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