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2004 के शपथ-पत्र में सौतेले पिता द्वारा सम्पत्ति में अन्य बच्चों के सम


15-Jun-2026 (In Civil Law)
मेरा नाम शुभम कुमार उर्फ सोनू है। मेरी जन्मतिथि 16.12.1996 है। मेरी माता संतोष कुमारी का प्रथम विवाह कामता प्रसाद अहिरवार से हुआ था, जिससे मेरा जन्म हुआ। बाद में मेरी माता और मेरे जैविक पिता के बीच अलगाव हो गया। वर्ष 2004 में मेरी माता ने प्रताप सिंह अहिरवार के साथ पुनर्विवाह किया। उस समय एक शपथ-पत्र/हलफनामा तैयार किया गया, जो मेरे पास मूल रूप में सुरक्षित है। उक्त शपथ-पत्र में स्पष्ट रूप से मेरा नाम "शुभम कुमार उर्फ सोनू" लिखकर यह उल्लेख किया गया है कि मेरी पढ़ाई-लिखाई, पालन-पोषण, विवाह तथा अन्
Answers (5)

Answer #1
624 votes
आपके द्वारा बताए गए तथ्यों के अनुसार यदि आपकी माता के पुनर्विवाह के समय शपथ-पत्र में आपके पालन-पोषण, शिक्षा तथा अन्य जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्ट घोषणा की गई थी, तो वह दस्तावेज आपके पक्ष में महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकता है। हालांकि आपके जैविक पिता से आपका कानूनी संबंध केवल पुनर्विवाह के कारण समाप्त नहीं होता। यदि विवाद नाम, उत्तराधिकार, संपत्ति, अभिभावकत्व या अन्य नागरिक अधिकारों से संबंधित है, तो सभी दस्तावेज जैसे जन्म प्रमाणपत्र, शपथ-पत्र, विद्यालय अभिलेख तथा अन्य पहचान पत्रों का परीक्षण आवश्यक होगा। उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आपके अधिकारों का निर्धारण संबंधित दस्तावेजों एवं मामले की परिस्थितियों के अनुसार किया जाएगा।
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Answer #2
524 votes
कृपया जानकारी पूरी बताये अधूरी जानकारी ना दे आपके फादर का डिवोर्स कब हुआ? क्या आप कहना चाहते ही की affidavit में पढ़ाई लिखाई,पालन पोषण विवाह आपके दूसरे पिता प्रताप सिंह की जिम्मेदारी सौंपता हे? में बताना चाहता हूँ affidavit या हलफनामा से किसी की शादी नहीं हो जाती है उस समय हिंदू विवाह और special marrige act जैसे कानून बनाये जा चुके थे इसलिय इसे कोर्ट में चैलेंज किया जा सकता हे यदि आप अधिक जानकारी देंगे संभव में आपकी मदद करूँगा ।
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Answer #3
737 votes
प्रिय शुबम कुमार उर्फ सोनू जी, आपके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार आपका जन्म आपके जैविक पिता कामता प्रसाद अहिरवार से हुआ था। बाद में आपकी माता द्वारा प्रताप सिंह अहिरवार से पुनर्विवाह किया गया तथा उस समय एक शपथ-पत्र/हलफनामा भी तैयार किया गया, जिसमें आपके पालन-पोषण, शिक्षा, विवाह एवं अन्य पारिवारिक उत्तरदायित्वों का उल्लेख किया गया है। प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि केवल शपथ-पत्र के आधार पर किसी व्यक्ति के जैविक पिता का कानूनी दर्जा स्वतः परिवर्तित नहीं हो जाता। यदि आप वर्तमान में अपने दस्तावेजों (जन्म प्रमाण-पत्र, आधार, शैक्षणिक अभिलेख, जाति प्रमाण-पत्र आदि) में पिता के नाम, अभिभावकत्व या उत्तराधिकार संबंधी स्थिति के संबंध में कानूनी सलाह चाहते हैं, तो निम्न दस्तावेजों का अवलोकन आवश्यक होगा— जन्म प्रमाण-पत्र की प्रति। माता-पिता के विवाह एवं पुनर्विवाह से संबंधित दस्तावेज। उक्त मूल शपथ-पत्र/हलफनामे की प्रति। आपके शैक्षणिक एवं पहचान संबंधी दस्तावेज। वर्तमान विवाद अथवा उद्देश्य (नाम परिवर्तन, उत्तराधिकार, संपत्ति, जाति प्रमाण-पत्र, या अन्य) का स्पष्ट विवरण। दस्तावेजों के परीक्षण के पश्चात ही यह निश्चित राय दी जा सकती है कि आपके मामले में पिता के नाम, अभिभावकत्व, उत्तराधिकार अथवा अन्य कानूनी अधिकारों के संबंध में क्या वैधानिक स्थिति बनेगी तथा आगे कौन-सी कानूनी कार्यवाही उचित होगी।
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Answer #4
806 votes
आप क्या चाहते हैं पहले या स्पष्ट करें वास्तव में कानूनी रूप से आपके प्रथम पिता आपके संपत्ति प्रदान करने के लिए उत्तरदाई होंगे परंतु यदि शपथ पत्र या हालतना में के जरिए दूसरे पिता प्रताप सिंह अहिरवार ने आपको लेकर कोई कमिटमेंट किया है तो वह भी निश्चित रूप से कानून के दायरे में आपके पक्ष में है व्यापक जानकारी और कैसे लगाने के लिए आप संपर्क कर सकते हैं
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Answer #5
851 votes
Aap ka Dika Pehle Pita Jo Tumhare Mool father Hai Tumhari maa Ke Pehle Pati Jo Tumhare Pita Hai Unki Jovi Sampati Hai acha chal Us mein Aapka Bedi group Se Hak Rahega Use kabhi kar sakte hain kabhi Bhi Apne Pita Se Apna Sak Jaye Woh Pathar mein Likha Ho Ya Yaana Likha Aapke Jab Patta Hai aur Jab tu Aap ka Dikka Hame Sasura chitra SA Unki Sampath Jo Bhi Hai Us Karna kar sakte Aap ko Milna
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