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जमीन का बंटवारा धारा 116 एसडीएम कोर्ट


12-Feb-2025 (In Property Law)
सर मेरे केस में प्रारंभिक आदेश का ऑर्डर हुआ उसके बाद लेख पाल द्वारा चिट्ठी पुष्टि का ऑर्डर पास हुआ उसके बाद विपक्षी द्वारा उसी केस में बाद दायरा दिया गया जिस पर 6 महीने सुनवाई हुई वाद दायरा निरस्त हो गया फिर 21/08/2024/रिकॉल एप्लीकेशन दिया जिसको SDO महोदय ने सुनवाई करके निरस्त कर दिया फिर से उसी फाइल में कल पुनः वाद दायरा पड़ा जिसको एक्सेप्ट करके पुनः सुनवाई चालू कर दिए क्या जीवन भर उसी फाइल में बार सुनवाई करेंगे इनकी शिकायत कहां करे कृपया मदद करे
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Answer #1
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समाधान: आपके मामले में बार-बार वही वाद दायर किया जा रहा है, जो न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग (Abuse of Process of Law) का मामला हो सकता है। इस स्थिति में आप निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं: रिट याचिका (Writ Petition) दायर करें: आप हाई कोर्ट में आदेश की स्थिरता (Finality of Order) बनाए रखने के लिए एक रिट याचिका (Writ Petition under Article 226 of the Constitution of India) दायर कर सकते हैं। याचिका में यह अनुरोध करें कि बार-बार एक ही विवाद पर मामले की पुनः सुनवाई अनुचित है। SDO के आदेश के विरुद्ध अपील करें: यदि SDO ने पुनः वाद स्वीकार कर लिया है, तो आप उच्च प्राधिकारी (जैसे कमिश्नर या राजस्व न्यायाधिकरण) के समक्ष अपील (Appeal) दायर कर सकते हैं। अपील में तर्क दें कि पूर्व में वाद खारिज हो चुका है, अतः पुनः उसी मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार करना विधि-सम्मत नहीं है। अनावश्यक मुकदमेबाजी (Vexatious Litigation) की शिकायत करें: यदि विपक्षी पक्ष बार-बार जानबूझकर परेशान करने के लिए वाद दायर कर रहा है, तो आप न्यायालय में CPC की धारा 11 (Res Judicata) और धारा 151 (Inherent Powers of Court) के तहत अर्जी देकर मामले को स्थायी रूप से खारिज करने (Dismissal with Costs) का अनुरोध कर सकते हैं। राजस्व विभाग या उच्चाधिकारियों से शिकायत करें: यदि राजस्व अधिकारियों की कार्रवाई संदेहास्पद या पक्षपातपूर्ण लगती है, तो आप डीएम (जिलाधिकारी) या संभागीय आयुक्त (Divisional Commissioner) को लिखित शिकायत कर सकते हैं। आप लोकायुक्त (Lokayukta) या प्रशासनिक न्यायाधिकरण (Administrative Tribunal) में भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। क्या करें? हाईकोर्ट में रिट दायर करें ताकि बार-बार एक ही मामले पर सुनवाई रोकी जा सके। SDO के आदेश के खिलाफ अपील करें। CPC की धारा 11 और 151 के तहत स्थायी निस्तारण के लिए न्यायालय में आवेदन दें। राजस्व विभाग या लोकायुक्त से शिकायत करें। यदि आपको और कानूनी सहायता की आवश्यकता हो, तो आप किसी अनुभवी वकील से परामर्श करें।
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